अँग्रेजी दैनिक नेशनल मेल से सन 1993 में अपना कॅरियर प्रारम्भ करने वाले डॉ. प्रमोद शंकर सोनी स्वतंत्र रुप यूं तो काफी पहले से ही लेखन कर रहे थे. पर पत्रकारिता में कॅरियर उन्होने अँग्रेजी दैनिक नेशनल मेल से प्रारम्भ किया. स्कूली जीवन से ही उन्होने अपने लेखन से राज्य और जिला स्तरीय लेखन प्रतियोगिताओं में अनेक पुरुस्कार व प्रशंसा बटोर लो थी. कालेज के दिनों में पढ़ाई के साथ इन्होने "नेशनल मेल" ज्वाइन कर लिया ताकि प्रोफेशनल स्तर पर अपने आपको मांझ सकें. इस दौरान डॉ. सुरेश मेहरोत्रा व स्व. नासिर कमाल साहब जैसे वरिष्ठ पत्रकारों के मार्गदर्शन मैं इन्होने अपने लिखने कि कला को मांझा. उन दिनों में जब मात्र 850/- रुपये मासिक सेलेरी मिलती थी लगन के साथ डॉ प्रमोद ने पत्रकारिता कि बारीकियों को समझा जाना. 3 वर्ष पश्चात उच्च अध्ययन के लिये फ़िर ये बाहर चले गये पर वहाँ से भी अपना लेखन जारी रखा. लौटने के बाद इन्होने "फ्री प्रेस जनरल" ज्यॉइन कर लिया और विधान सभा समेत विभिन्न प्रभागों में सफल रिपोर्टिंग की. सन 2001 में इनका चयन "टाइम्स ऑफ इंडिया" व "इंडियन एक्सप्रेस" जैसे ख्याति प्राप्त अख़बारों मॆं हो गय़ा पर अपनी माता जी के ह्रदय रोग के कारण उन्होंने भोपाल मैं ही रहना पसंद किया और कालान्तर मॆं स्वतंत्र लेखन के साथ ही अपनी होम्योपैथी की प्रेक्टिस भी प्रारम्भ कर दी साथ ही "दैनिक भास्कर, जागरण, नवभारत, सत्यकथा क्रानिकल, हिन्दुस्तान टाइम्स, वुमन्स इरा व अन्य देश विदेश की विभिन्न हिन्दी अंग्रेजी पत्र पत्रिकाएँ के लिये निर्बाध रूप से लेखन करने लगे. इनके निरन्तर लेखन के फलस्वरूप सन 2004 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा इन्हे राज्य स्तरीय अधिमन्यता मिल गई. निरन्तर "हेल्थ ऐट होम" व "वर्ल्ड हेल्थ टाइम्स" का सफल सम्पादन सम्भालने के बाद डॉ सोनी ने "टाइम्स व्यूज़ डॉट कॉम" का प्रभार सम्भाला और वर्तमान मॆं भोपाल में इसके सम्पादक हैं. सन 2011 में इन्होने मानसिक रोगियों की समस्या को देखते हुये डिप्रेशन पर एक पुस्तक "डिप्रेशन से छुटकारा" लिखी जो न केवल भारत वरन विदेशो मॆं भी भारी प्रशंसित हुयी. IIT कानपुर, IIT मुम्बई जैसे ख्यातिलब्ध संसाधानो ने इस पुस्तक की न केवल भूरि भूरि प्रशंशा की बल्कि अपनी लायब्रेरी मे भी छात्रों के लिये उपलब्ध करवाया. "बेस्ट सेलर बुक का तगमा हासिल कर हाल ही इस पुस्तक को गुजराती भाषा में अनुवादित कर उतार गया है. लेखक व पत्रकार होने के अलावा डॉ प्रमोद शंकर सोनी होम्योपैथी के भी अच्छे जानकार हैं और विभिन्न असाध्य बीमारियों को ठीक करने का माद्धा रखते हैं सांथ ही समय समय पर निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन भी करते हैं. प्रतीत होता है कि डॉ प्रमोद शंकर सोनी को लेखन की नेसर्गप्रिक प्रतिभा अपने पिता श्री हरिशंकर सोनी से मिली है जो सेवानिवृत्त आई. पी.एस अधिकारी होने के साथ साथ उच्च कोटि के कवि व लेखक हैं. डॉ सोनी की मानसिक रोगों पर 2 पुस्तकें अँग्रेजी व हिन्दी भाषा में मार्केट में शीघ्र पदार्पण करने वाली है. उनकी सफलता के लिये हम अभी से उन्ही अग्रिम शुभकामनाएं देते हैं
"महेश दीक्षित"
संपादक 6 PM
भोपाल
Wednesday, January 20, 2016
डॉ प्रमोद शंकर सोनी ; एक बहुमुखी व्यक्तित्व
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