Tuesday, September 27, 2016

डेंगू का दंश


डॉ. प्रमोद शंकर सोनी
उस दिन जब मि. शर्मा आफिस से घर पहुंचे तो बेहद थके हुए थे. चाय का कप पकडाते हुए जब उनकी पत्नी ने उनसे पूछना चाहा की, आज क्यों वे बेहद थके हुए नजर आ रहे हैं तो शर्मा जी ने केवल इतना ही जवाब दिया की उनके सारे शरीर में बेहद दर्द व अकडन हो रही है. बातों ही बातों मे श्रीमती शर्मा ने जब उनका माथा छुया तो घबरा उठी ओर बोली "आपको तो काफी तेज बुखार है' चलिए आप आराम करिए में आपको क्रोसिन दे देती हूँ'. रात भर बेचेनी में करवटें बदलने के बाद सुबह व दुसरे दिन भी जब उनका बुखार कम नहीं हुआ तो उन्होंने डाक्टर से सम्पर्क किया जहाँ उन्हें कुछ दवाइयों के साथ खून की जांच करवाने को कहा गया. अगले दिन जब डाक्टर ने रिपोर्ट देखी तो उन्हें डेंगू से संक्रमित पाया. तत्पश्चात, लगभग २० दिन के पश्चात ही शर्मा जी स्वस्थ हो पाए.

आज लगभग हर शहर, अखबार, न्यूज चेनल तेजी से महामारी का रूप लेते डेंगू व इसके प्रकोप को दिखा रहे हैं. हममें से अधिकतर लोग इसे सामान्य बुखार समझ कर इसके लक्षण पहचानने में काफी देरी कर देते है जिसके कारण मरीज की हालात ओर बिगड़ने लगती है. विभिन्न मध्यमो से प्रयास किये जा रहें की डेंगू के सम्बन्ध में जन्मानस को अधिक से अधिक जानकारी मिल सके ताकि इसे शीघ्र पहचाना जा सके व उसका समय पर उपचार कराया जाए ताकि पीड़ित व्यक्ति को गंभीर स्थिति में जाने से बचाया जा सके. तो आइये इस आज हम यह डेंगू व इससे जुडी समस्त बातें जेसे, डेंगू क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं, इससे बचने के उपाय क्या हैं, व इसका इलाज क्या है जानते हैं ताकि हम न केवल स्वयं को इससे बचा सकें बल्कि परिवार के अन्य सदस्य व दूसरों को भी इसके प्रति जागरुक बना इस महामारी से बचा सकें-

क्या है आखिर डेंगू – डेंगू (dengue) एक वायरस से होने वाली बीमारी का नाम है जो एडीज एजेप्टी नामक मच्छर की प्रजाति के काटने से होती है. इसे हड्डी तोड़ “बुखार” या ब्रेक बोन बुखार भी कहा जाता है जिसके कारण तेज बुखार और शरीर व सर मे तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते है. डेंगू होने पर मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है जिसके कारण कई बार जान का जोखिम भी बन जाता है. यह किसी एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में ट्रांसफर नहीं होता है और केवल मच्छर के काटने से ही होता है.

डेंगू कब सबसे ज्यादा फैलता है - गर्मी और बारिश के मौसम में यह बीमारी बेहद तेजी से पनपती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि डेंगू के मच्छर हमेशा साफ़ पानी में ही पनपते है जैसे पीने का पानी, कूलर का पानी, गमलो में जमा पानी छत पर लगी पानी की टंकी, बाल्टियों अथवा घडों में अथवा फिर अन्य जगह जमा पानी में, जबकि मलेरिया के मच्छर हमेशा गंदे पानी में पैदा होते है. एक बात और ध्यान देने योग्य है की डेंगू के मच्छर ज्यादातर हमेशा दिन में ही काटते है

डेंगू के लक्षण/ डेंगू को कैसे पहचाने -
तेज ठंड और बुखार आना कमर, मांसपेशियों, जोड़ों और सिर में तेज दर्द हल्की खाँसी, गले में दर्द और खराश शरीर पर लाल-लाल दाने / रैशश दिखाई देता है. थकावट, भूख न लगना और कमजोरी उलटी और दर्द ऊपर दिए गए लक्षणों में से यदि कोई लक्षण दिखाई देता तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चहिये. खून कि जाँच में एनएस 1 टेस्ट दवारा डेंगू की जाचं की जाती है, जिसमे किया जाता है जिसके आधार पर ही डॉक्टर तय करते है की मरीज़ को डेंगू हुआ है या नहीं. डेंगू ज्वार वेसे तो काफी खतरनाक होता है पर ऐसा भी नहीं है की डेंगू होने से मरीज की जान चली ही जाए. ज्यादातर मामलो में डेंगू मच्छर के काटने से जान नहीं जाती है, या तो हल्का बुखार होता है या कोई फर्क नहीं पड़ता पर दुसरे अन्य मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता है.
डेंगू बुखार के प्रकार-
Dengue fever तीन तरह के होता है- क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार – classical dengue fever (CDF) डेंगू हॅमरेजिक बुखार (डीएचएफ) – dengue hemorrhagic fever (DHF) डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) – dengue shock syndrome (DSS) क्लासिकल डेंगू बुखार में से कभी किसी की जान नहीं जाती और ये साधारण इलाज़ से भी ठीक हो जाता है. जबकि डेंगू हॅमरेजिक बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम में यदि सही समय पर इलाज़ न किया गया तो मौत भी हो सकती है. कैसे करे

डेंगू का नियंत्रण- मच्छर के प्रजनन के स्थानों को खत्म करना डेंगू से बचने का सबसे पहला और असरदार तरीका है ताकि मच्छरों की आबादी ही न बढने पाए. इसके लिए या तो लार्वा पर नियंत्रण करना होता है या फ़िर वयस्क मच्छरों की आबादी पर। एडिस मच्छर अकसर स्वच्छ पानी मे अपनी जनसंख्या बढाते है, जैसे कूलर, गुलदस्ते, मटके टायर, बोतलें इत्यादि. अत: इन्हें समय समय पर खाली करते रहना चाहिए ताकि पनप रहे लार्वा का नियंत्रण हो सके. डेंगू के मच्छर मनुष्य के घरों के आसपास ही पाए जाते हैं और ये जमे हुए पानी में पलते बढ़ते हैं। अतः इस बात को सुनिश्चित करें कि आपके घर में या आस पास पानी जमा तो नहीं है. कूलरो में मिट्टी के तेल का छिडकाव करे. हर एक दो दिन में घडो और बाल्टियों में जमा पानी को हटाते रहे व घरो में दरवाजो और खिडकियों पर सीलन की सफाई रखे। अपने घर के आसपास साफ सफाई रखें क्योंकि मच्छर दिन में अंधेरे और नम स्थानों में रहना पसंद करते हैं। इस बात का ध्यान रखें की आपके घर और आस पास के इलाकों साफ सफाई की जा रही हो और इन जगहों पर निरंतर मच्छर मार दवाओं का छिडकाव किया जा रहा हो. घर में मच्छरों के काटने से बचने के लिए विशेष उपाय करना बेहद जरुरी है, वरना एक ही मच्छर आपको बेहद गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। डेंगू के रोकथाम के लिए यह जरुरी है कि डेंगू के मछरो द्वारा स्वयं को काटने से बचाएं व इन मछरो के फैलने पर नियन्त्रण रखा जाए।
- घरो में दरवाजो और खिडकियों पर सफाई रखे।
- जितना हो सके बच्चो को पूरी बाजू के कपडे पहेनाये
- घर और गली में कीटनाशक का छिडकाव जरुर करवाए
- जितना हो सके इस मौसम में घर की खिडकियों को बंद करके रखे
- कूड़े के डिब्बे में कूड़ा न जमा होने दे.
- आसपास जमे पानी का कोई स्त्रोत ना हो। - मॉस्क्विटो रेपेलेंट्स का प्रयोग करें
- दरवाज़े और खिड़कियों पर जाले लगाएं ।
- शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें
-अगर आपके परिवार के लोगों में से कोई भी अचानक बीमार पड़ जाता है और इसके लक्षण सर्दी खांसी के लगते हैं अथवा अगर बुखार घर में ठीक न हो रहा हो तो किसी डॉक्टर से तुरंत जांच करवाएं डेंगू का इलाज़ आमतौर पर इस बीमारी के लक्षणों का उपचार डॉक्टर के द्वारा सुझाई गई दवाइयों से ही किया जाता है और मरीजों को सलाह दी जाती है की वे शरीर में पानी की कमी होने से बचाने के लिए काफी मात्रा में लिक्विड जेसे नारियल पानी आदि का सेवन करें। साथ ही डेंगू के मरीजों को इस बीमारी के दौरान पूरी तरह आराम करने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि अगर इस बीमारी का तुरंत इलाज ना किया गया तो 2 से 3 दिन के अंदर स्थिति काफी गम्भीर हो जाती है। रोगी को मुख से लिक्विड अथवा तरल देते रहना चाहिए क्योंकि इस दौरान अक्सर शरीर में पानी की कमी होने लगती है. जरुरत पड़ने पर नसों के द्वारा भी लिक्विड दिया जाता है. गम्भीर अवस्था में यदि खून में प्लेटलेटस की संख्या काफी कम हो जाये अथवा या फिर रक्तस्त्राव शुरू हो जाये तो खून भी चढाना भी पड़ सकता है. आंतो मे रक्तस्त्राव होने पर ब्लड ट्रांस्फ्यूजन की जरूरत पड सकती है. इस दोरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की इस अवस्था में एस्प्रीन या फिर कुछ अन्य दवाओं को लेने से रक्तस्त्राव बढ जाता है. इसलिए यह ध्यान रहे की मरीज को ऐस्प्रिन के स्थान पर केवल पेरासिटामोल ही दें.
सामान्य मेडिकल चिकित्सा के अलावा घर मे भी सावधानी के तौर पर कुछ तरीके अपनाये जाने चाहिये जैसे,
*रोगी को ज्यादा से ज्यादा तरल चीजे देना चाहिये ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो
*मरीज को पपीते के पत्ते पानी पीस कर दिए जा सकते है. यह शरीर में प्लेटलेट्स (platelets) बढाने का काम करते है.
*जितना हो सके नारियल पानी और जूस पिलाये. *मरीज को डिस्प्रीन और एस्प्रीन की गोली कभी ना दें *बुखार कम करने के लिए पेरासिटामॉल की गोली दी जा सकती है डेंगू व होमयोपैथिक चिकित्सा डेंगू से बचाव व इसके बाद होने वाली समस्याओं के लिए होम्योपैथी भी एक बेहद सफल व उपयोगी इलाज सिद्ध हुया है.
प्रिवेंशन व उपचार के तौर पर युपोटोरियम पर्फ (Eupotorium Perf) नामक दवा ३० अथवा २०० पोटेन्सी की कुछ दिन लेने से अच्छे परिणाम सामने आते हैं. यदि बुखार व बेचेनी भी साथ में हो तो बेलाड़ोना (Belladona) व आर्सेनिक एल्ब (Arsenicum Album) की २०० पोटेंसी की चिकित्सक की सलाह से ली जा सकति है. होम्योपेथिक की ये दवाएं आसानी से होम्यो स्टोर में उपलब्ध हैं. इनके अलावा भी कुछ होम्यो दवाएं मुलार्क के रूप में जिनमे चिरायता Q (Chirayata Q) , ओसिमम सेंकटम Q (Ocimum Sanctum Q) की १५-१५ बूंद दिन में ३ बार देने से बुखार बदन दर्द व जकडन जैसी अन्य तकलीफों में काफी आराम मिला जाता है.
डेंगू व आयुर्वेदिक उपचार -आयुर्वेद में पपीते के पत्तो का रस व् व्हीट ग्रास का जूस प्लेटलेटस बढाने में सहायक होते हैं जिसे आसानी से लिया जा सकता है. इनके अलावा कुछ शस्त्रोक्त आयुर्वेदिक दवाये जिनमे महासुदर्शन क्वाथ व महासुदर्शन घनवटी शामिल है, चिकित्सक के परामर्श अनुसार ली जा सकती है. डेंगू ज्वर में चूँकि रोगप्रतिरोधक क्षमता बेहद कम हो जाती है, इसलिए गिलोय घन वटी का सेवन भी इस दौरान बेहद उपयोग सिद्ध होता है जो इम्युनिटी बूस्टर का काम करता है.

डेंगू व इसका टीका -
देखा जाए तो अभी तक डेंगू ठीक करने की कोई खास दवाई तैयार नहीं हो पाई है साथ ही डेंगू के बुखार के लिए फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नही है व केवल सुरक्षा से ही इससे बचा जा सकता है। ज्ञात रहे की एक वायरस के कारण होने वाली इस बिमारी की वजह से सामान्य दवाइयां इस रोग पर कार्य नहीं कर पाती। यद्धपि, इस समय डेंगू के 6 टीके बनने की अवस्था में हैं, पर इनमें से किसी ने भी पूर्ण विकसित होने का चरण स्पर्श नहीं किया है। जो टीका इस समय जनता के लिए उपलब्ध होने के सबसे नज़दीक है, वह है 3 स्टेज टीका (3 stage vaccine), जो कि खासतौर पर बच्चों के लिए तैयार किया गया है। इसने तैयारी का तीसरा चरण पूरा कर लिया है. लेकिन इस टीके के द्वारा भी करीब 50% से कुछ ज़्यादा बीमारियों का ही इलाज ही होना संभव हो पाया है।
भविष्य के उपचार- नये अध्ययन बताते है कि माइसोफेनोलिक एसिड तथा रिबाविरिन का प्रयोग करने से विषाणु का आर.एन.ए. दोषपूर्ण बन जाता है व डेंगू के विषाणु की वृद्धि रूक जाती है.

डॉ. प्रमोद शंकर सोनी
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