वह जो पहले दिन अणु बनता है मां के पेट में वह अणु आपके पूरे शरीर की रूपाकृति अपने में छिपाए हुए होता है। पचास साल बाद आपके बाल सफेद हो जायेंगे, यह संभावना भी उस छोटे से बीज छिपी थी। आपकी आंखों का रंग कैसा होगा। आपके हाथ कितने लंबे होंगे, आप स्वास्थ होंगे या बीमार। आप गोरे होंगे या काले, आपके बाल कैसे होंगे, सीधे या घुंघराले, ये तमाम बातें उस अणु में छुपी थी। जो उस समय वह अणु एक छोटी सी देह लिए परिपूर्ण था। वह ऐटमिक बाड़ी है, अणु शरीर, उस अणु शरीर में आत्मा प्रविष्ट होती है। उस अणु शरीर की जो संरचना है, उस अणु शरीर की जो स्थिति है, जो सिचुएशन है उसके अनुकूल आत्मा उसमे प्रविष्ट होती है।
और दुनिया में जो मनुष्य जाति का जीवन और चेतना रोज नीचे गिरती जा रही है। उसका एक मात्र कारण है कि दुनियां के दंपति श्रेष्ठ आत्माओं का जन्म देने की संभावना और सुविधा पैदा नहीं कर पा रहे। जो सुविधा पैदा की जा रही है, वह अत्यंत निकृष्ट आत्माओं के पैदा होने की सुविधा है।
आदमी के मर जाने के बाद जरूरी नहीं है कि उस आत्मा को जल्दी ही जन्म लेने का अवसर मिल जाए। साधारण आत्माएं, जो न बहुत श्रेष्ठ होती है, और न निकृष्ठ होती है। तेरह दिन के भीतर नए शरीर की खोज कर लेती है। लेकिन बहुत निकृष्ट आत्माओं को रूकना पड़ता है। क्योंकि उतना निकृष्ट अवसर मिलना मुश्किल है। उन निकृष्ट आत्माओं को ही हम प्रेत कहते है। बहुत श्रेष्ठ आत्माएं भी रूक जाती है। क्योंकि उन्हें श्रेष्ठ अवसर उपलब्ध नहीं मिलता। उन श्रेष्ठ आत्माओं को हम देवता कहते है।
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