Tuesday, September 27, 2016

डॉ. प्रमोद शंकर सोनी
उस दिन जब मि. शर्मा आफिस से घर पहुंचे तो बेहद थके हुए थे. चाय का कप पकडाते हुए जब उनकी पत्नी ने उनसे पूछना चाहा की, आज क्यों वे बेहद थके हुए नजर आ रहे हैं तो शर्मा जी ने केवल इतना ही जवाब दिया की उनके सारे शरीर में बेहद दर्द व अकडन हो रही है. बातों ही बातों मे श्रीमती शर्मा ने जब उनका माथा छुया तो घबरा उठी ओर बोली "आपको तो काफी तेज बुखार है' चलिए आप आराम करिए में आपको क्रोसिन दे देती हूँ'. रात भर बेचेनी में करवटें बदलने के बाद सुबह व दुसरे दिन भी जब उनका बुखार कम नहीं हुआ तो उन्होंने डाक्टर से सम्पर्क किया जहाँ उन्हें कुछ दवाइयों के साथ खून की जांच करवाने को कहा गया. अगले दिन जब डाक्टर ने रिपोर्ट देखी तो उन्हें डेंगू से संक्रमित पाया. तत्पश्चात, लगभग २० दिन के पश्चात ही शर्मा जी स्वस्थ हो पाए.

आज लगभग हर शहर, अखबार, न्यूज चेनल तेजी से महामारी का रूप लेते डेंगू व इसके प्रकोप को दिखा रहे हैं. हममें से अधिकतर लोग इसे सामान्य बुखार समझ कर इसके लक्षण पहचानने में काफी देरी कर देते है जिसके कारण मरीज की हालात ओर बिगड़ने लगती है. विभिन्न मध्यमो से प्रयास किये जा रहें की डेंगू के सम्बन्ध में जन्मानस को अधिक से अधिक जानकारी मिल सके ताकि इसे शीघ्र पहचाना जा सके व उसका समय पर उपचार कराया जाए ताकि पीड़ित व्यक्ति को गंभीर स्थिति में जाने से बचाया जा सके. तो आइये इस आज हम यह डेंगू व इससे जुडी समस्त बातें जेसे, डेंगू क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं, इससे बचने के उपाय क्या हैं, व इसका इलाज क्या है जानते हैं ताकि हम न केवल स्वयं को इससे बचा सकें बल्कि परिवार के अन्य सदस्य व दूसरों को भी इसके प्रति जागरुक बना इस महामारी से बचा सकें-

क्या है आखिर डेंगू – डेंगू (dengue) एक वायरस से होने वाली बीमारी का नाम है जो एडीज एजेप्टी नामक मच्छर की प्रजाति के काटने से होती है. इसे हड्डी तोड़ “बुखार” या ब्रेक बोन बुखार भी कहा जाता है जिसके कारण तेज बुखार और शरीर व सर मे तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते है. डेंगू होने पर मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है जिसके कारण कई बार जान का जोखिम भी बन जाता है. यह किसी एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में ट्रांसफर नहीं होता है और केवल मच्छर के काटने से ही होता है.

डेंगू कब सबसे ज्यादा फैलता है - गर्मी और बारिश के मौसम में यह बीमारी बेहद तेजी से पनपती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि डेंगू के मच्छर हमेशा साफ़ पानी में ही पनपते है जैसे पीने का पानी, कूलर का पानी, गमलो में जमा पानी छत पर लगी पानी की टंकी, बाल्टियों अथवा घडों में अथवा फिर अन्य जगह जमा पानी में, जबकि मलेरिया के मच्छर हमेशा गंदे पानी में पैदा होते है. एक बात और ध्यान देने योग्य है की डेंगू के मच्छर ज्यादातर हमेशा दिन में ही काटते है

डेंगू के लक्षण/ डेंगू को कैसे पहचाने -
तेज ठंड और बुखार आना कमर, मांसपेशियों, जोड़ों और सिर में तेज दर्द हल्की खाँसी, गले में दर्द और खराश शरीर पर लाल-लाल दाने / रैशश दिखाई देता है. थकावट, भूख न लगना और कमजोरी उलटी और दर्द ऊपर दिए गए लक्षणों में से यदि कोई लक्षण दिखाई देता तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चहिये. खून कि जाँच में एनएस 1 टेस्ट दवारा डेंगू की जाचं की जाती है, जिसमे किया जाता है जिसके आधार पर ही डॉक्टर तय करते है की मरीज़ को डेंगू हुआ है या नहीं. डेंगू ज्वार वेसे तो काफी खतरनाक होता है पर ऐसा भी नहीं है की डेंगू होने से मरीज की जान चली ही जाए. ज्यादातर मामलो में डेंगू मच्छर के काटने से जान नहीं जाती है, या तो हल्का बुखार होता है या कोई फर्क नहीं पड़ता पर दुसरे अन्य मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता है.
डेंगू बुखार के प्रकार-
Dengue fever तीन तरह के होता है- क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार – classical dengue fever (CDF) डेंगू हॅमरेजिक बुखार (डीएचएफ) – dengue hemorrhagic fever (DHF) डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) – dengue shock syndrome (DSS) क्लासिकल डेंगू बुखार में से कभी किसी की जान नहीं जाती और ये साधारण इलाज़ से भी ठीक हो जाता है. जबकि डेंगू हॅमरेजिक बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम में यदि सही समय पर इलाज़ न किया गया तो मौत भी हो सकती है. कैसे करे

डेंगू का नियंत्रण- मच्छर के प्रजनन के स्थानों को खत्म करना डेंगू से बचने का सबसे पहला और असरदार तरीका है ताकि मच्छरों की आबादी ही न बढने पाए. इसके लिए या तो लार्वा पर नियंत्रण करना होता है या फ़िर वयस्क मच्छरों की आबादी पर। एडिस मच्छर अकसर स्वच्छ पानी मे अपनी जनसंख्या बढाते है, जैसे कूलर, गुलदस्ते, मटके टायर, बोतलें इत्यादि. अत: इन्हें समय समय पर खाली करते रहना चाहिए ताकि पनप रहे लार्वा का नियंत्रण हो सके. डेंगू के मच्छर मनुष्य के घरों के आसपास ही पाए जाते हैं और ये जमे हुए पानी में पलते बढ़ते हैं। अतः इस बात को सुनिश्चित करें कि आपके घर में या आस पास पानी जमा तो नहीं है. कूलरो में मिट्टी के तेल का छिडकाव करे. हर एक दो दिन में घडो और बाल्टियों में जमा पानी को हटाते रहे व घरो में दरवाजो और खिडकियों पर सीलन की सफाई रखे। अपने घर के आसपास साफ सफाई रखें क्योंकि मच्छर दिन में अंधेरे और नम स्थानों में रहना पसंद करते हैं। इस बात का ध्यान रखें की आपके घर और आस पास के इलाकों साफ सफाई की जा रही हो और इन जगहों पर निरंतर मच्छर मार दवाओं का छिडकाव किया जा रहा हो. घर में मच्छरों के काटने से बचने के लिए विशेष उपाय करना बेहद जरुरी है, वरना एक ही मच्छर आपको बेहद गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। डेंगू के रोकथाम के लिए यह जरुरी है कि डेंगू के मछरो द्वारा स्वयं को काटने से बचाएं व इन मछरो के फैलने पर नियन्त्रण रखा जाए।
- घरो में दरवाजो और खिडकियों पर सफाई रखे।
- जितना हो सके बच्चो को पूरी बाजू के कपडे पहेनाये
- घर और गली में कीटनाशक का छिडकाव जरुर करवाए
- जितना हो सके इस मौसम में घर की खिडकियों को बंद करके रखे
- कूड़े के डिब्बे में कूड़ा न जमा होने दे.
- आसपास जमे पानी का कोई स्त्रोत ना हो। - मॉस्क्विटो रेपेलेंट्स का प्रयोग करें
- दरवाज़े और खिड़कियों पर जाले लगाएं ।
- शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें
-अगर आपके परिवार के लोगों में से कोई भी अचानक बीमार पड़ जाता है और इसके लक्षण सर्दी खांसी के लगते हैं अथवा अगर बुखार घर में ठीक न हो रहा हो तो किसी डॉक्टर से तुरंत जांच करवाएं डेंगू का इलाज़ आमतौर पर इस बीमारी के लक्षणों का उपचार डॉक्टर के द्वारा सुझाई गई दवाइयों से ही किया जाता है और मरीजों को सलाह दी जाती है की वे शरीर में पानी की कमी होने से बचाने के लिए काफी मात्रा में लिक्विड जेसे नारियल पानी आदि का सेवन करें। साथ ही डेंगू के मरीजों को इस बीमारी के दौरान पूरी तरह आराम करने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि अगर इस बीमारी का तुरंत इलाज ना किया गया तो 2 से 3 दिन के अंदर स्थिति काफी गम्भीर हो जाती है। रोगी को मुख से लिक्विड अथवा तरल देते रहना चाहिए क्योंकि इस दौरान अक्सर शरीर में पानी की कमी होने लगती है. जरुरत पड़ने पर नसों के द्वारा भी लिक्विड दिया जाता है. गम्भीर अवस्था में यदि खून में प्लेटलेटस की संख्या काफी कम हो जाये अथवा या फिर रक्तस्त्राव शुरू हो जाये तो खून भी चढाना भी पड़ सकता है. आंतो मे रक्तस्त्राव होने पर ब्लड ट्रांस्फ्यूजन की जरूरत पड सकती है. इस दोरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की इस अवस्था में एस्प्रीन या फिर कुछ अन्य दवाओं को लेने से रक्तस्त्राव बढ जाता है. इसलिए यह ध्यान रहे की मरीज को ऐस्प्रिन के स्थान पर केवल पेरासिटामोल ही दें.
सामान्य मेडिकल चिकित्सा के अलावा घर मे भी सावधानी के तौर पर कुछ तरीके अपनाये जाने चाहिये जैसे,
*रोगी को ज्यादा से ज्यादा तरल चीजे देना चाहिये ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो
*मरीज को पपीते के पत्ते पानी पीस कर दिए जा सकते है. यह शरीर में प्लेटलेट्स (platelets) बढाने का काम करते है.
*जितना हो सके नारियल पानी और जूस पिलाये. *मरीज को डिस्प्रीन और एस्प्रीन की गोली कभी ना दें *बुखार कम करने के लिए पेरासिटामॉल की गोली दी जा सकती है डेंगू व होमयोपैथिक चिकित्सा डेंगू से बचाव व इसके बाद होने वाली समस्याओं के लिए होम्योपैथी भी एक बेहद सफल व उपयोगी इलाज सिद्ध हुया है.
प्रिवेंशन व उपचार के तौर पर युपोटोरियम पर्फ (Eupotorium Perf) नामक दवा ३० अथवा २०० पोटेन्सी की कुछ दिन लेने से अच्छे परिणाम सामने आते हैं. यदि बुखार व बेचेनी भी साथ में हो तो बेलाड़ोना (Belladona) व आर्सेनिक एल्ब (Arsenicum Album) की २०० पोटेंसी की चिकित्सक की सलाह से ली जा सकति है. होम्योपेथिक की ये दवाएं आसानी से होम्यो स्टोर में उपलब्ध हैं. इनके अलावा भी कुछ होम्यो दवाएं मुलार्क के रूप में जिनमे चिरायता Q (Chirayata Q) , ओसिमम सेंकटम Q (Ocimum Sanctum Q) की १५-१५ बूंद दिन में ३ बार देने से बुखार बदन दर्द व जकडन जैसी अन्य तकलीफों में काफी आराम मिला जाता है.
डेंगू व आयुर्वेदिक उपचार -आयुर्वेद में पपीते के पत्तो का रस व् व्हीट ग्रास का जूस प्लेटलेटस बढाने में सहायक होते हैं जिसे आसानी से लिया जा सकता है. इनके अलावा कुछ शस्त्रोक्त आयुर्वेदिक दवाये जिनमे महासुदर्शन क्वाथ व महासुदर्शन घनवटी शामिल है, चिकित्सक के परामर्श अनुसार ली जा सकती है. डेंगू ज्वर में चूँकि रोगप्रतिरोधक क्षमता बेहद कम हो जाती है, इसलिए गिलोय घन वटी का सेवन भी इस दौरान बेहद उपयोग सिद्ध होता है जो इम्युनिटी बूस्टर का काम करता है.

डेंगू व इसका टीका -
देखा जाए तो अभी तक डेंगू ठीक करने की कोई खास दवाई तैयार नहीं हो पाई है साथ ही डेंगू के बुखार के लिए फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नही है व केवल सुरक्षा से ही इससे बचा जा सकता है। ज्ञात रहे की एक वायरस के कारण होने वाली इस बिमारी की वजह से सामान्य दवाइयां इस रोग पर कार्य नहीं कर पाती। यद्धपि, इस समय डेंगू के 6 टीके बनने की अवस्था में हैं, पर इनमें से किसी ने भी पूर्ण विकसित होने का चरण स्पर्श नहीं किया है। जो टीका इस समय जनता के लिए उपलब्ध होने के सबसे नज़दीक है, वह है 3 स्टेज टीका (3 stage vaccine), जो कि खासतौर पर बच्चों के लिए तैयार किया गया है। इसने तैयारी का तीसरा चरण पूरा कर लिया है. लेकिन इस टीके के द्वारा भी करीब 50% से कुछ ज़्यादा बीमारियों का ही इलाज ही होना संभव हो पाया है।
भविष्य के उपचार- नये अध्ययन बताते है कि माइसोफेनोलिक एसिड तथा रिबाविरिन का प्रयोग करने से विषाणु का आर.एन.ए. दोषपूर्ण बन जाता है व डेंगू के विषाणु की वृद्धि रूक जाती है.

डॉ. प्रमोद शंकर सोनी
49 vaishali nagar
Kotra
Bhopal(India)
Mobile -09827764650

Sunday, September 25, 2016

सफेद दाग (Leucoderma)

परिचय:-

देखा जाए तो सफेद दाग अपने आप में कोई रोग नहीं है बल्कि त्वचा में मलानीन द्रव्य की कमी हो जाने से त्वचा का रंग सफेद हो जाता है। सफेद दाग रोगी व्यक्ति के सम्पर्क से नहीं फैलता है। इस रोग में कोई शारीरिक परेशानी, जलन या खुजली नहीं हाती है सिर्फ चेहरे पर दाग ही रहते हैं। चेहरे पर सफेद दाग के कारण व्यक्ति में मानसिक तनाव हो जाता है तथा हीनता की भावना पैदा हो जाती है।
          सफेद दाग कोई असाध्य रोग नहीं है इसलिए इस रोग के होने पर किसी भी प्रकार की हीनभावना से ग्रस्त या निराश नहीं होना चाहिए बल्कि दाग होने पर बड़ी आसानी से कम समय में इसका उपचार किया जा सकता है और उसको बढ़ने से रोका जा सकता है अन्यथा इसको ठीक करने में कुछ महीने से लेकर कुछ वर्षों तक का समय लग जाता है।

सफेद दाग होने का लक्षण-

          इस रोग के कारण शरीर के किसी भी भाग में त्वचा पर छोटा सा दाग पीले रंग से शुरू होकर सफेद रंग का दाग बन जाता है। यह दाग जगह-जगह फैलते हुए बड़े-बड़े चकतों के रूप में भी हो सकता है।

सफेद दाग होने का कारण-

दूषित भोजन सेवन करने के कारण व्यक्ति के शरीर में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तब यह सफेद दाग का रोग व्यक्ति को हो जाता है।
आंतों में कीड़े लगने के कारण भी सफेद दाग का रोग हो सकता है।
सफेद दाग कई प्रकार के रोग होने के कारण भी हो सकता है जैसे- पेचिश, कब्ज, चर्मरोग, टायफाइड, तपेदिक (टी.बी.), एक्जिमा, दमा, मधुमेह, फोड़े, चोट, जलना तथा लीवर (जिगर) संबन्धी रोग आदि।
मल-मूत्र के वेग को रोकने के कारण भी त्वचा पर सफेद दाग हो जाते हैं।
शरीर में हार्मोन्स की गड़बड़ी तथा मानसिक आघात होने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
अधिक नमक, मिर्च मसाले वाली चीजों के खाने से यह रोग हो सकता है।
घटिया किस्म की बिंदी लगाने तथा ब्लीचिंग का अधिक प्रयोग करने के कारण भी सफेद दाग का रोग हो सकता है।
शक्तिशाली एन्टीबायोटिक तथा तेज औषधियों का सेवन करने के कारण भी सफेद दाग का रोग हो सकता है।
अधिक नशीली चीजों का सेवन करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
सफेद दाग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

सफेद दाग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों तथा सब्जियों का रस पीना चाहिए तथा फिर बिना पके हुए भोजन का सेवन करना चाहिए। हरी सब्जियां तथा अंकुरित अन्न का सेवन बहुत लाभदायक होता है।
सफेद दाग से पीड़ित रोगी को हर 2 सप्ताह के बाद एक दिन उपवास रखना चाहिए।
चुकन्दर, भिगोए हुए अंकुरित काले चने, अंजीर, खजूर, तुलसी के पत्ते, त्रिफला और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर तथा नीम की पत्तियों का सेवन करने से यह रोग ठीक हो जाता है।
रात को सोते समय तांबे के बर्तन में पानी को भरकर रख दें और सुबह के समय में इस पानी को पीने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
सफेद दाग से पीड़ित रोगी को कॉफी, चाय, चीनी, नमक, मिर्च-मसालेदार, डिब्बा बंद भोजन, नशीली वस्तुएं, मांस तथा अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए।
इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने पाचन संस्थान की सफाई करनी चाहिए ताकि पाचनक्रिया ठीक प्रकार से हो सके। रोगी को अपने पेट की सफाई करने के लिए एनिमा क्रिया करना चाहिए। फिर रोगी को अपने पेट पर मिट्टी की पट्टी का लेप करना चाहिए तथा इसके बाद कटिस्नान, कुंजल क्रिया करनी चाहिए।
1 छोटे चम्मच बावची के चूर्ण को सुबह तथा शाम पानी के साथ सेवन करने से सफेद दाग के रोग में बहुत अधिक लाभ मिलता है।
सफेद दाग के रोग में सूर्यतप्त आसमानी तेल की मालिश तथा सूर्यतप्त पीले पानी का सेवन करना भी लाभदायक होता है।
सफेद दागों पर तुलसी का रस मलने से कुछ ही दिनों में सफेद दाग खत्म हो जाते हैं।
एक कांच की बोतल में अपने पेशाब को भरकर एक सप्ताह के लिए रख दें। इसके बाद धूप में बैठकर इस पेशाब से अपने शरीर की मालिश करने से सफेद दाग कुछ महीने में ही ठीक हो जाते हैं।
जानकारी-

         इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा सफेद दाग का उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

Tuesday, September 20, 2016

Dengue N Chikin Gunia Treatment

'For Dengue N Chikan Gunia'
Homeo+ Ayurvedic medicines
(1)Eupotorium Perf. 200c
8 pills 3 times daily for a weak.
Take following Ayurvedic medicines too.

(2) Mahasudarshan Kyaath
4 spoon with 1/2 cup of water 2.times daily

(3) Mahasudarshan Ghan Vati
2 tab. 2 times daily for 10 days
##For prevention only Eupotorium Perf 200C for 5 days if enough which would work as preventive

***If the problem already gripped the person and pain rashes or fever started, gv all 3 above combo of homoeo and Ayurvedic medicines for atleast 15 days....For further information feel free to call or contact .
With Regards,
Dr.Pramod Shanker Soni
Consulting Homoeopath
Bhopal
09827764650

Monday, September 5, 2016

B(-) ve blood donors

B(-) ve blood donors
1 Ankush 8968296996 
2 JASKARAN 9779510772
3 GURKIRAT 9779941766
4 Sheet 9826575567
5 Manoj 9827523069
6 Sumit 9425057962
7 Dr. Arun 9425063126
8 Kailsh 9301330009
9 Vikas 9406628436
10 Vakar 8982019567
11 Anshul 9425052665
12 Nishank 9977883070
13 Rishi 9893152428
14 Deepika 9425491772
15 Sahil 9009744844
16 Dr. Sharad 9893242466
17 Narendra 7828535415
18 Naushad 9826548346
19 Piyush 9977776532
20 Pawan 9893089111
21 Pankaj 9425311835
22 Ghanshyam 9993609800
23 Sharad 9827046962
25 Indira 9300774839
26 Rohan 9949993291
27 Santosh 9826027099
28 Hitesh 9826870106
29 Purshotham 9754644095
30 Gaurav 9977282200
31 Kalpana 9753032119
32 Mayank 9826056867
33 Amit 9993102004
34 Navneet 9425060423
35 Arun 9827718499
36 Prabu 9442818212
37 Rahul 9200326251
38 Pawan 9907135559
39 Babita 9981111484
40 Anchal 9926930996
41 Rajat 9039698214
42 Padam 9826026499
43 Umashankar 9179137849
44 Deepak 7415114565
45 Surendra 9827210873
46 Bharat 9893053844
47 Ram 9827329920
48 Banerji 9424888798
49 Ram 9826029555
50 Girish 9302101236
51 Ruchi 9425104849
52 Vishnu 9302107560
53 Manish 9046892003
54 Krishna 9826328384
55 Khushboo 9425431099
56 Ashutosh 9425066311
57 Vishal 9893123731
58 Pravesh 9630229664
59 Hitesh 9302416166
60 Nasir 9893010054
61 Shivendra 9425968449
62 Sandeep 9893495639
63 Firoz 9302102629
64 Pradeep 9425496649
65 Alok 8103108325
66 Rakesh 9425077008
67 Divesh 9301680479
68 Ankit 9977326135
69 Surendra 9993703363
70 Shailendra 9300860009
71 Gaurav 9302104902
72 Anuj 9826470102
73 Gyan 9827528287
74 Mukesh 9893003600
75 Shailendra 9302101448
76 Priyank 9630082293
77 Nadeail 9827223632
78 Abhay 7566689864
79 Vinit 9893433699
80 Tarun 9926460712
81 Abhishek 9977600260
82 Sundip 07314201826
83 Krishna 8871712240
84 Shyamal 9893078148
85 Vaibhav 9826022143
86 Anthony 9826028297
87 Kalpana 9229135174
88 Neelima 7898938989
89 Golu 9584318006
90 Rohit 9893299991
91 Radheshyam 9827231494
92 Sachin 9826068321
93 Adarsh 9752722448
94 Atul 9425079105
95 Roshni 9301280244
96 Remi 9425061732
97 Manoj 8889616161
98 Reema 9977250887
99 Bhushan 9755097212
100 Abhishek 9229934444
101 Vikas Waghmare9302340110
102 shashank shukla 9424101020
103 Rahul 9009572253
कृपया इसे फॉरवर्ड करें ताकि किसी ज़रूरतमंद की सहायता हो सके।
ज़रूरतमंद को अब एक कॉल में खून मिलेगा..!!
BLOOD DONATION CALL CENTRE
MOB.- 9779510772 , 8968296996 , 9779941766
कृपया दूसरे ग्रुप वालो को ज़रूर भेजें... दर्द न बाँट सका वह ईनसानियत बाँटता फिर रहा है यहीं कहीं, बहरहाल थोड़ी कोशिश जरुरी है ।

Saturday, September 3, 2016

The Blind Girl....

There was a blind girl who hated herself just because she was blind. She hated everyone, except her loving boyfriend. He was always there for her. She said that if she could only see the world, she would marry her boyfriend. One day, someone donated a pair of eyes to her and then she could see everything, including her boyfriend. Her boyfriend asked her, “Now that you can see the world, will you marry me?” The girl was shocked when she saw that her boyfriend was blind too, and refused to marry him. Her boyfriend walked away in tears, and later wrote a letter to her saying: “Just take care of my eyes dear.” This is how human brain changes when the status changed. Only few remember what life was before, and who’s always been there even in the most painful situations.

Tuesday, August 23, 2016

Car owner name

You can know who is the actual owner of the car by sending an SMS with car number.

Just send the SMS : VAHAN “CAR NUMBER” to 7738299899

and it will give you the details of the owner as below

Car owner name
Vehicle Model
Finance done by
RC expiry date

Sunday, July 3, 2016

The youngest mother in the world.

 Lina medina is the youngest mother in the world who gave birth to a baby boy mererly at the age of 5 in the year 1939.
Lina Medina, a Peruvian girl, gave birth to a baby boy at the tender age of just five years and seven months in the year 1939.
Teenage pregnancies are something that are still quite common in most parts of the world despite laws prohibiting underage marriage. She delivered a baby boy via C-section in Lina Medina gave birth to a baby boy at the tender age of just five years and seven months in the year 1939. But the youngest mother to give birth in recorded history is shockingly a girl old enough to be a kindergartner.  Lina Medina, 5, was even found to have fully developed sex organs. (Credit: YouTube) Initially Lina from Peru's Andes was taken to the doctors because of an abdominal swelling which her parents suspected of being a tumour. But tests revealed that Lina was in fact seven months pregnant, according to First To Know. Dr. Gerardo Lozada even observed that the little girl’s mammary glands and sexual organs were fully developed at the time. Although Lina’s father had been arrested by the police on suspicions of incest and rape, he was later released due to lack of evidence. The identity of the man who made Lina pregnant was never determined.
Lina delivered a baby boy via a C-section on May 14, 1939 and named him, Gerardo, after her doctor. In the beginning, young Gerardo grew up believing that Lina was his elder sister and only came to know of their true relationship at the age of 10 only.